क्या दिसम्बर’२१ में होगा बड़ा परिवर्तन ?...
रेवांचल टाईम्स डेस्क :- इन दिनों देश के विभिन्न राजनेताओं के भविष्य का वर्णन करने वाले ज्योतिषी और उनकी भविष्यवाणी चर्चा में है | देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिसम्बर २०२१ तक ही प्रधानमन्त्री बने रहने की भविष्यवाणी कोलकाता और उज्जैन के ज्योतिषी कर रहे हैं | उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश में भी भारी राजनीतिक उथल पुथल के संकेत ज्योतिषी देख रहे हैं | कुछ पाठकों भी इसी माहौल में ज्योतिष की सामान्य जानकारी चाही है | उन्हीं पाठको के लिए आज का “प्रतिदिन”|
वैसे ज्योतिष उस विद्या को कहते हैं जिसमें मनुष्य तथा पृथ्वी पर, ग्रहों और तारों के शुभ तथा अशुभ प्रभावों का अध्ययन किया जाता है। ज्योतिष शब्द का यौगिक अर्थ ग्रह तथा नक्षत्रों से संबंध रखने वाली विद्या है। इस शब्द से यद्यपि गणित (सिद्धांत) ज्योतिष का भी बोध होता है, तथापि साधारण लोग ज्योतिष विद्या से फलित विद्या का अर्थ ही लेते हैं।
ग्रहों तथा तारों के रंग भिन्न-भिन्न प्रकार के दिखलाई पड़ते हैं, अतएव उनसे निकलनेवाली किरणों के भी भिन्न भिन्न प्रभाव हैं। इन्हीं किरणों के प्रभाव का भारत, बैबीलोनिया, खल्डिया, यूनान, मिस्र तथा चीन आदि देशों के विद्वानों ने प्राचीन काल से अध्ययन करके ग्रहों तथा तारों का स्वभाव ज्ञात किया गया । तदनुसार पृथ्वी सौर मंडल का एक ग्रह है। अतएव इसपर तथा इसके निवासियों पर मुख्यतया सूर्य तथा सौर मंडल के ग्रहों और चंद्रमा का ही विशेष प्रभाव पड़ता है। पृथ्वी विशेष कक्षा में चलती है जिसे क्रांतिवृत्त कहते हैं। पृथ्वी फलित ज्योतिष उस विद्या को कहते हैं जिसमें मनुष्य तथा पृथ्वी पर, ग्रहों और तारों के शुभ तथा अशुभ प्रभावों का अध्ययन किया जाता है। पृथ्वी के इर्द गिर्द कुछ तारामंडल हैं, जिन्हें राशियाँ कहते हैं। इनकी संख्या १२ है। मेष राशि को आरंभ बिंदु मानकर, 30-30 अंश की 12 राशियों की कल्पना की गई है।
अपने लंबे इतिहास के दौरान, ज्योतिष विज्ञान ने कई क्षेत्रों में शोहरत प्राप्त की और परिवर्तन के साथ-साथ इनमें विकास भी हुआ। ऐसी कई ज्योतिष परम्पराएं भी हैं जिनका ऐतिहासिक महत्त्व है, मगर आज वे बहुत कम प्रयोग में आती हैं। ज्योतिष के ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण परंपराओं में शामिल हैं:-अरबी और फारसी ज्योतिष ,बेबीलोन ज्योतिष, मिस्र ज्योतिष,माया ज्योतिष आदि हैं |पश्चिमी, चीनी और भारतीय ज्योतिष के इतिहास में कुछ परम्पराओं की चर्चा मुख्य रूप से की गई है।इनमे गुप्त परम्परा,सूफी,क्ब्बाला आदि हैं | कुछ अन्य परम्पराओं में, जैसे की आगम भविष्यवाणी में, बहुत से ज्योतिषी ज्योतिष के अपने काम में परम्पराओं को सम्मिलित करते हैं|कई मायनों में ये मनोगत या गुप्त ज्ञान को खोजने में एक दूसरे के पूरक यही और हैं ।
भारत में किसी भी राजनीतिक दल से सम्बन्धित राजनेता अपने भविष्य के प्रति चिंतित होते है | देश का भविष्य उनकी अंतिम प्राथमिकता होती है, इसके चलते वे देश के नागरिको को अवैज्ञानिक सोच मव उलझा कर प्रगति के सोपान अवरुद्ध करते हैं |
दिसम्बर में कौन राजनेता कहाँ होगा ज्योतिषी बता रहे हैं, मैं तो सिर्फ इतनी भविष्यवाणी क्र सकता हूँ |” किसी भी दल का नेता कहीं भी रहे धनवान होगा और नागरिक निर्धन|”
राकेश दुबे

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