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कहो तो कह दूँ = अब पता लगा कि " डायनासोरों " को "कोरोना" ने ही निबटाया था... - revanchal times new

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निष्पक्ष एवं सत्य का प्रवर्तक

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Monday, February 21, 2022

कहो तो कह दूँ = अब पता लगा कि " डायनासोरों " को "कोरोना" ने ही निबटाया था...


रेवांचल टाईम्स - कहते हैं कि हजारों लाखों साल पहले इस धरती पर विशालकाय डायनासोर हुआ करते थे, लेकिन धीरे धीरे उनका वजूद ख़त्म हो गया और अब डायनासोर सिर्फ फोटुओं में  दिखाई देते हैं l ये डायनासोर कैसे ख़तम हो गए उनकी मौत का क्या कारण था इस पर खोजबीन जारी थी और अब जाकर पता लगा कि ये साला "कोरोना" डायनासोरों  पर भी भारी पड़ गया था l कहा तो ये जा रहा था कि ये कोरोना चीन में बनाये गए वायरस से उत्पन्न हुआ हैं लेकिन अमेरिका के मोटान राज्य के माल्टा शहर के "डाक्टर कैरी वुडरफ" ने बताया कि उनकी खोज से ये बात सामने आई कि डायनासोरों को भी सर्दी होती थी, खांसी आती थी, बुखार भी चढ जाता था और फेंफडों में भी संक्रमण हो जाता था और उससे उनकी मौत हो जाती थी l ये सारे लक्षण तो कोरोना के ही हैं यानि ये साला कोरोना उस जमाने से दुनिया में घूम रहा हैं और डायनासोरों जैवे विशालकाय जानवरों को  तक अलसेठ दे चुका  हैं तो इंसान की बिसात ही क्या है, यानी  सारे डायनासोर  इसी चक्कर में  मरे होंगे  क्योकि उस जमाने ने "प्राइवेट अस्पताल" तो  होते नहीं थे कि बेचारे भर्ती हो जाते, सरकारी अस्पतालों की हालत लगता है उस वक्त भी ऐसी ही रही होगी जैसी आज हैं कि अगर वंहा गए तो लौट कर आ जाओगे इस बात की कोई गारंटी नहीं है l डायनासोरों के पास न तो "मास्क" था और न ही वे "सोशल डिस्टेंसिंग" का पालन ही करते होंगे, कोई ऐसा नेता भी नहीं रहा होगा जो सारे देश में "लॉक डाउन" की घोषणा कर दे यानि किसी एक डायनासोर को कोरोना हुआ होगा  तो उसने पूरी जात  के डायनासोरों में ये बीमारी फैला दी होगी l उस ज़माने में "रेमेडिसीवर इंजेक्शन" भी नहीं रहे होंगे और न ही नकली रेमेडिसीवर बनाने और लगाने  वाले अस्पताल के संचालक ही रहे होंगे, यानि कुल मिलकर ये डायनासोर बिना इलाज के खत्म हो गए होंगे l अगर कम से काम मास्क ही लगा लेते तो बच  जाते लेकिन उनके मुंह के बराबर का मास्क भी तो "अवेलेबल" नहीं होता होगा लगाते तो लगाते , कैसे    "आइसोलेट" भी नहीं हो पाए होंगे ऐसे  में कोरोना फैलना था तो फ़ैल  गया l अमेरिका के डाक्टर ने ये अच्छी खोज करी,  नाहक ही सब लोग चीन को  गरिया रहे थे कि चाइना ने कोरोना का वायरस बना दिया हैं लेकिन इस खोज से साफ़ हो गया कि ये कोरोना लाखों साल पुराना  है एक बात जरूर हैं कि यदि  उस वक्त "वेक्सीन" आ जाती तो  वेक्सीन के दोनों और बूस्टर डोज लगवाने वाले डायनासोर ज़िंदा  रहे  आते और उन्हें हम सिर्फ  फोटुओं में  नहीं बल्कि सामने भी देख  पाते l


ये गुरु महाराज भी बड़े अजीब हैं  


लो भैया जो लड़के सर पर सेहरा बाँध कर घोड़ी पर चढ़कर  अपने दोस्तों  का नागिन डांस देखते हुए दुल्हन के द्वार पर जाने की सोच रहे थे उनको अपने "गुरु महाराज" ने अड़ी  पटक दी हैं , अब वे "अस्त" हो गए हैं और  पंद्रह अप्रेल  को फिर से उदय होंगे,  यानी इतने दिनों  तक  शादी  ब्याह पर स्टॉप लग गया  है जो दूल्हे इस बीच निबट गए तो निबट गए और जो रह गए उन्हें  अब उन्हीं गुरुजी के  उदय  होने का इन्तजार करना पड़ेगा l  अभी तो अपने को "सूरज"  के उदय और अस्त होने के बारे  में मालूम था  ये गुरूजी कब से उदय और अस्त होने लगे हैं लेकिन पंडित लोग बताते हैं  कि उनके  उदय और अस्त होने का सिलसिला तो hajaro साल पुराना हैं  चूंकि गुरु महाराज  शादी ब्याह के  देवता माने जाते हैं इसलिए जब  अस्त  हो जाते हैं तो शादी ब्याह रुक जाती हैं कभी शुक्र महाराज भी अस्त हो जाते हैं उस वक्त भी  इन शादी ब्याह करने वाले लड़की और लड़कियों को परेशानी हो जाती हैं l कभी देवता सो जाते हैं तो कई महीने शादी ब्याह नही हो पाती  हैं और जब देवता जागते हैं तो शादी ब्याह की  भरमार हो जाती हैं, पंडितों के ये हाल हो जाते हैं कि एक फेरा यंहा का करवाते  हैं तो दूसरा फेरा दूसरे दूल्हे का, एक मंत्र इस शादी में पढ़ते  हैं तो दूसरा मन्त्र  दूसरी शादी में  हलवाई एक जगह "रसगुल्ला" बनाकर आता हैं तो दूसरी जगह "मूंग का हलुआ" बनाने पहुंच जाता हैं  अपनी  तो "गुरूजी" से और "शुक्राचार्य जी" से एक ही विनती हैं कि ये अस्त और उदय  होने की  परंपरा ख़त्म करो  हमेशा  जागते रहो,  एलर्ट रहो और बारह महीने  दूल्हों को  "घोड़ी" पर और दुल्हनों को "डोली" में बैठने दो l


इश्क जो न कराएं  थोड़ा हैं 


सुना हैं कि अपने प्रदेश के एक बड़े शहर में एक कालेज के संचालक ने इश्क के  चक्कर  में अपनी बीबी  को तलाक दे दिया, बीबी भी तलाक के लिए  राजी हो गयी क्योकि उसने सोचा कि जब अपना आदमी दूसरी औरत के इश्क जाल में  फंस ही  गया हैं तो उसके साथ रहने का फायदा ही  क्या l इश्क का मारा कालेज  का  संचालक  बीबी को तलाक देने के बदले करींब दो करोड़ की सम्पति देने के लिए तैयार हो गया हैं इसमें  नगद, सोना, चांदी, मकान सब कुछ शामिल हैं  इसलिए कहा जाता हैं कि प्यार में आदमी  "अंधा" और "दीवाना"हो जाता हैं  कई बरस अपनी बीबी के साथ गुज़ारने के बाद  कालेज  संचालक  को अपनी  असिस्टेंट  के  प्यार  का ऐसा बुखार चढ़ा  कि वो करोडो रुपया देने तैयार हो गया इसलिए किसी गीतकार ने  लिखा हैं "प्यार दीवाना होता हैं मस्ताना  होता हैं हर खुशी और हर गम से बेगाना  होता है" यानि इतना माल जाने के बाद होने  भी होने वाले  गम से वो अनजान है l प्यार पर तो सैकड़ों गीत भी बने हैं कोई तो इश्क़ के चक्कर में मरने भी तैयार हैं  और कह रहा है "मैं तेरे इश्क में मर न जाऊं  कंही, तू मुझे  आजमाने की कोशिश   न कर" तो किसी ने लिखा है "प्यार करने वाले कभी डरते नहीं जो डरते हैं  वो प्यार करते नहीं"  दूसरी बात इश्क  की कोई उम्र  तो होती नहीं अब उन्हीं  को देख लो, बीस साल का बेटा  हैं यानि उम्र अभी पचास के आसपास तो होगी फिर भी इश्क  हो गया और वो भी अपने से कई बरस छोटी से  लेकिन प्यार तो प्यार हैं इसलिए किसी शायर ने लिखा हैं  "अगर  तू वजह ना पूछे तो एक बात कहूँ तेरे बिना अब  हमसे  जिया नहीं जाता" 


 सुपर हिट ऑफ़  द वीक 


"सुनो जी जब आपने पहली बार मेरा घूंघट उठाया था तो आपको कैसा लगा था" श्रीमती जी ने श्रीमान जी से  बेहद  रोमांटिक अंदाज में पूछा 


"माँ कसम  मैं तो  मर ही जाता अगर  मुझे  रामसे बदर्स की हॉरर फ़िल्में  देखने की आदत न होती" श्रीमान जी  का उत्तर था।

                                     चैतन्य भट्ट

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