दैनिक रेवांचल टाइम्स - मंडला आदिवासी बाहुल्य जिले में यूं तो हमारा मुख्यालय मवई सहित आसपास का संपूर्ण इलाका सदैव से ही उपेक्षा का शिकार रहा है 'उस पर भी शासन और प्रशासन की अनदेखी के चलते यहां पर हर काम के पीछे एक कहावत चरितार्थ होती है और वह कहावत है - 9 दिन चले अढ़ाई कोस |इसी कहावत के आधार पर चल रहा है मवई क्षेत्र का हर एक काम । जिसका खामियाजा भुगतने के लिए ही बनी है भोली भली जनता | समय-समय पर अपनी आवाज को शासन और प्रशासन तक पहुंचाने के लिए समाचार पत्र पत्रिकाओं और व्हाट्सएप ग्रुप पर क्रिया प्रतिक्रिया व्यक्त करते रहते हैं लेकिन इन सबसे कितना फर्क पड़ता है यह तो सर्वविदित है |चाहे वह कोई भी समस्या हो ।चाहे सड़क हो पानी की समस्या हो बिजली की समस्या हो शिक्षा की समस्या हो अथवा स्वास्थ्य की समस्या हो ।
जुलाई का महीना गुजरने को है लेकिन अभी भी उमस भरी गर्मी से निजात नहीं मिल पाया जिस में भी बिजली की किल्लत से आमजन को खासी परेशानी झेलनी पड़ती है |कभी मेंटेनेंस के नाम पर कभी बचत के नाम पर तो कभी 33kv पर चल रहे काम के नाम पर जब जी चाहा लाइट नदारद हो जाती है |कभी दिन में तो कभी रात में उमस भरी गर्मी से हला कान होना पड़ता है । बैंकिंग सहित सारे कार्यालयीन काम प्रभावित हो रहा है जिसके लिए आमजन को करना पड़ता हैभीड़ में खड़े होकर इंतजार | साधन संपन्न तो अपनी जरूरत की पूर्ति इनवर्टर से कर लेता है शायद इसीलिए इन विषयों में अपनी एनर्जी खराब करना मुनासिब नहीं समझते |
दूरदराज से आए खेती बाड़ी का काम छोड़कर बेचारे दिन दिन भर बिजली की किल्लत के कारण इंतजार करके बैठे रहते हैं ।ना कोई तूफान और ना आंधी पर कई कई घंटे से बिजली गायब ।दिनभर चुभती धूप और रात में गर्मी से परेशानी और बिजली रहती है गायब | आज दिन में ही लगभग 6 घंटे से बिजली गायब है आखिर इन सब के पीछे कारण क्या है कोई क्यों नहीं पूछता ?

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