शिकायतकर्ता की बिना सहमति के महाविधालय के प्राचार्य सीएम हेल्पलाइन में दे दी झूठी जानकारी और शिकायत बंद करवाने के लिऐ बना रहे दवाब...
रेवांचल टाईम्स - मंडला आदिवासी बाहुल्य जिले में सच में ही अधिकारियों कर्मचारियों के लिऐ अवैध पैसा कमाई करने का अड्डा बन गया है। जिले में जो भी अधिकारी आता है। सिर्फ पैसा और जनता के पैसों का दुरुपयोग कर शोषण किया जा रहा है। और कम समय में लखपति से करोड़ पति बन जाते है। वही महाविद्यालय के प्राचार्य ने ठेकेदार के साथ मिलकर ऐसी रचना रची की 5 लाख पानी में बह गए और महाविधालय के प्राचार्य कहते है। की कोई घोटाला नही हुआ है। मगर ठेकेदार अधिकारी कर्मचारी भ्रष्टाचार की इतनी हद पार चुके है। कि उन्हें लगता ही नहीं है। कि हम कैसे और किससे और कितना पैसा हजम कर रहे हैं। उन अधिकारियों को पैसे से मतलब होता है। और जब शिकायत होती है। प्रशासन में बैठे जिम्मेदार अधिकारी सिर्फ खानापूर्ति कर और कागजों जांच को उलझा कर चले जाते है। जिसके कारण शिकायत में क्या कार्रवाई हुई किसी को नहीं पता है। वही प्रशासन में बैठे इन भ्रष्टाचारियों को सिर्फ समझाइश देकर ही छोड़ दिया जाता है ।जिसके कारण इनके हौसले बुलंद हो चुके है।उनको पता होता है। कि जो जांच करने आते हैं। वह भी कमीशन लेकर और जांच को दबाने की दक्षिणा ले चुके होते हैं। जिसके कारण करोड़ों के घोटाले कागजों में दबे धूल खा रहे है। जिसमे एक
क्या है। पूरा मामला
नैनपुर नगर में ऐसे अनोखे मामले सामने आए जिसमें शिकायतें हुई मगर जांच क्या हुई आज तक किसी को नहीं पता है इसी तरह एक मामला नैनपुर शासकीय स्नातक महाविद्यालय ने सीएम हेल्पलाइन की शिकायत में की गई तो प्राचार्य आइ के यादव द्वारा सीएम हेल्प लाइन में शिकायतकर्ता की बिना सहमति के झूठा जवाब प्रस्तुत कर दिया है, वही महाविद्यालय में विधायक निधि के पैसे की जमकर होली खेली है। और महाविधालय स्तर पर पुताई का ठेका निकाला गया मगर 5 लाख की पुताई में ऐसा खेल रचा की पूरे कॉलेज की पुताई चुना से करवा दी वही पुताई एक बारिश भी नहीं टिक पाई और आज कॉलेज पहले जैसे से भी बत्तर और काला महल दिखाई देने लगा है। मगर वही जब इसकी जानकारी महाविद्यालय के जबाबदारो से जननी चाही गई तो उनका कहना है। पुताई कोई घोटाला नही हुआ है। झूठी शिकायत की जा रही है।
इनका कहना है।
मेरे द्वारा सीएम हेल्पलाइन में शिकायत की गई थी।मगर कॉलेज के प्राचार्य द्वारा मेरे बिना सहमति के बार-बार शिकायत बंद कर दी जा रही है।और शिकायत को बंद करने के लिऐ मानसिक दवाब बनाया जा रहा है।
सुजीत कुमार शिकायतकर्ता

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